शुक्रवार

अभिव्यंजना संस्था अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है .पर चौथेपन में कदापि नहीं। अभी अभी तो शैशव से किलकारी मारते हुए पैयाँ पैयाँ बाल्यकाल में प्रवेश किया है। अभी आप की उंगली थामकर न जाने कितनी मंजिलें तय करनी हैं। आप से विमर्श करने में हमें बड़ा हर्ष हो रहा है।

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